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Tuesday, May 26, 2015

रुचिकर विषयों से जुड़ने का प्रयास करें-हिन्दी चिंत्तन लेख(ruchikar vishayon se judne ka prayas karen-hindi thought article)


पहले लोगों के पास अपने जीवन में प्रयोग तथा नयी अनूभूतियों के सीमित साधन थे। पुरुषों के लिये तो फिर भी बाहर सक्रियता के कारण अधिक प्रयोग के अवसर थे चाहरदीवारी के अंदर रहने वाली महिलाओं का तो पूरा जीवन ही सीमित दायरों में गुजरता था।  शायद इसलिये अब तक यह प्रश्न पूछा जाता है कि सारे धर्मों की स्थापना पुरुषों ने ही क्यों की? इसका जवाब यही है कि उस समय महिलाओं का जीवन संक्षिप्त दायरे में बीतता था इसलिये व्यापक सक्रियता के अभाव में वह पुरुषों की बराबरी नहीं कर सकी। अब तो दोनों को समान अवसर मिल रहे हैं। कंप्यूटर, टीवी तथा स्मार्टफोन ने पुरुष तथा स्त्रियों दोनों के विश्व भर से जुड़ने का समान अवसर प्रदान किया है। अभी तक फिल्में देखकर पूरा समाज क्षणिक आनंद लेता था पर नये साधनों ने उसे व्यापक जानकारी, प्रयोग तथा अनुसंधान का अवसर प्रदान किया है।
बहरहाल हम जीवन के बदलते रूपों में आत्ममंथन की पक्रिया से जुड़ने के विषय पर चर्चा कर रहे हैं। हमारे विचार से पुरुष तथा स्त्रियों के लिये अपनी अपनी मनस्थिति पर बाह्य तत्वों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिये वर्तमान समय में पहले से ज्यादा साधन उपलब्ध हैं। टीवी पर कभी समाचार सुने तो अनेक बार उत्तेजित करने वाली खबरें आती हैं। अनेक कथित सामाजिक धारावाहिकों की कहानियां ऐसी हैं जिन्हें देखने पर मस्तिष्क अन्मयस्क हो जाता है। कभी दिमाग में घृणा तो कभी इश्क तो कभी डरावना भाव आता है। ऐसे में कभी किसी धार्मिक चैनल पर अच्छा भजन आ रहा है उसे सुनने में तत्लीन हो जायें तो सारे विषयों से दूर होकर मन उसमें रमना चाहता है।
हम अनेक बार पीटीसी चैनल पर स्वर्ण मंदिर में आने वाले सीधे प्रसारण को देखते हैं। अनेक बार वहां का प्रसारण मन इतना प्रसन्न कर देता है कि लगता है कि वही चैनल देखते रहें।  अभी भी इस समय हम स्थानीय प्रसारण में गुरुवाणी सुन रहे हैं तो मन प्रसन्न हो रहा है और दिल ही नहीं कर रहा कि समाचार या मनोरंजन चैनल पर जायें।
इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि हमें सांसरिक विषयों में उसी हद तक लिप्त रहना चाहिये जहां तक आवश्यकता हो। दूसरी बात यह कि हम मन को प्रसन्न करने वाले ही व्यक्ति, विषय तथा विचार की तरफ जायें न कि कष्ट वाले मार्ग का अनुसरण करें।
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दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’
ग्वालियर मध्यप्रदेश
Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
athor and editor-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
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