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Saturday, May 4, 2013

गुरु ग्रंथ साहिब से संदेश-छल कपट करने वालों की विपत्ति पर रोना व्यर्थ (chhal kapat karne walon ki vipatti par rona vyarth-guru granth sahib se sandesh)



    हमारा अध्यात्मिक दर्शन कहता है कि मनुष्य इस संसार में अपने संकल्प के आधार पर ही चलता है। जैसा वह संकल्प करता है वैसा ही दृश्य उसके सामने आता है। जब हम यह कहते हैं कि आजकल छलकपट करने वालों की संख्या अधिक हो गयी है तब अपने अंदर नहीं झांकते।  दरअसल हमारे अंदर कहीं न कहीं छल कपट रहता है।  समय आने पर कौन छल करने को तैयार नहीं होता? आजकल हमारे देश में भ्रष्टाचार को लेकर खूब चर्चा होती है। इसका इतना विरोध हो रहा है पर फिर भी वह कम नहीं हो रहा। दरअसल जो लोग भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं वह उससे अर्जित धन को  उपरी कमाई कहते है। दूसरा कमाई तो उनको भ्रष्टाचार लगता है। इतना ही नहीं समाज में लोग अब केवल धन के आकर्षण में आकर सम्मान करते हैं। वह यह नहीं देखते कि कोई आदमी किस तरह के धन से अमीर बना है।  जिस तरह समाज ने भ्रष्टाचारियों को मान्यता दी है वह एक तरह से समूचे सदस्यों के अंदर मौजूद छल कपट का ही परिणाम कहा जा कसता है। एक तरफ भ्रष्टाचार का विरोध दूसरी तरफ  उससे कमाई करने वाले का सम्मान करने का अपने आपसे ही छल न करना तो और क्या है? क्या समाज ने कभी किसी ऐसे व्यक्ति का बहिष्कार किया है जो भ्रष्टाचार के कारण अमीर बना है?
गुरुग्रंथ साहिब में कहा गया है कि
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जिना अंदरि कपटु विकार है तिना रोइ किआ कीजै।
हिन्दी में भावार्थ-जिन व्यक्तियों के मन में छल और कपट भरा है उनकी विपत्तियों पर रोना व्यर्थ है।
हिरदै जिनकै कपटु बाहरहु संत कहाहि।
तृस्ना मूलि न चुकई अंति गए पछुताहि।
हिन्दी में भावार्थ-अपने हृदय में कपट धारण करने वाले कथित संतों की पद, पैसे और प्रतिष्ठा की भूख कभी शांत नहीं होती। ऐसे लोगों को आखिरी समय में पछताना पड़ता है।
 
      भारतीय समाज में अनेक ऐसे कथित महान संत  सक्रिय हैं जिन्होंने भारी भरकम आश्रम बनाये हैं। शिष्यों के साथ वह संपदा का संग्रह कर रहे हैं।  कहा जाता है कि सच्चा गुरु वह है जो शिक्षा देकर शिष्य का त्याग करे पर यहां तो हर गुरु अपने शिष्यों की संख्या बढ़ाने में लगा है।  यही कारण है कि आम भक्तजन गुरुओं के छलिया तथा कपटी रूप को देखकर दुःखी होते है।  यही कारण है कि लोग आजकल किसी को गुरु नहीं बनाते। अगर बनाते हैं तो विश्वास नहंी करते। देखा तो यह भी जा रहा है कि जो लोग गुरु पर विश्वास करते हैं उनकी साथ धोखा भी होता है। अनेक गुरु जेलों में अपने शिष्यों के साथ ठगी और यौन शोषण के आरोप में जेल की हवा खा चुके हैं।  पहले तो गेरुऐ वस्त्र पहनना जहां सम्मान का प्रतीक था अब ऐसे गुरुओं की वजह से यह रंग भी बदनाम हो गया है।
गुरु ग्रंथ साहिब से संदेश-छल कपट करने वालों की विपत्ति पर रोना व्यर्थ

            हिन्दी साहित्य,अध्यात्मिक दर्शन,हिन्दू धर्म संदेश

दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’
ग्वालियर मध्यप्रदेश
Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 

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