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Sunday, April 5, 2015

भारतीय योग विधा पर अभी भी विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता-हिन्दी लेख(India yoga education and america-hindi article)

अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय योग को किसी धर्म विशेष से जुड़ा मानने से इंकार करते हुए उसे वहां जारी रखने की अनुमति प्रदान कर दी है। जिस तरह विश्व में भारतीय अध्यात्मिक दर्शन की इस योग विद्या का प्रचार हुआ है उसे देखते हुए पश्चिमी देशों में इसे किसी धर्म से जोड़ने की संभावना वैसे भी नहीं लगती। खासतौर से ईसाई बाहुल्य देशों के जनमानस में इसके प्रति कोई दुर्भाव नहीं दिखाता। इस पर अधिक प्रसन्न होकर गर्व करने जैसी भी कोई बात नहीं है क्योंकि अभी हमें अपने देश में इसके व्यापक प्रसार की संभावना अभी भी जीवंत लगती हैं।  योग साधना की प्रशंसा सभी करते हैं पर इसके साथ नियमित रूप से जुड़े लोगों की संख्या अभी भी कम है।  इतना ही नहीं चिकित्सकों के घर जाने का जिन रोगियों का अनुभव व्यापक हो गया है वह भी अर्द्धचिकित्सक बनकर योग के महत्वहीन होने का प्रचार यह कहते हुए करते हैं कि योग से कोई बीमारी ठीक नहीं होंती उसके लिये दवाईयां लेना जरूरी है।
वैसे हम भी यह मानते हैं कि योग साधना के नियमित अभ्यास से कोई बीमारी दूर नहीं होती वरन् आसन, प्राणायाम तथा ध्यान से हमारी देह के अंदर स्थित देह, मन और विचारों के विकार दूर होते हैं और हमारा जीवन स्वस्थ मार्ग पर स्वाभाविक रूप से अग्रसर हो जाता है। उस मार्ग पर  बीमारियों का कोई स्थान नहीं होता। यह वैसा ही जैसा हम कष्टकर  राह से सुगम  पर जाते हैं। जैसे हम किसी ऐसी राह से गुजरे जहां कांटे और खाईंयां हों तब परेशान होकर हम अपनी राह बदल लें और वहां कोई संकट न हो तब यह तो नहीं कह सकते कि मार्ग से कांटेे और खाईयां दूर हो गयी हैं-क्योंकि हम जानते हैं कि हमने राह बदली है न कि कांटे और खाईयां हटाये हैं।
          वैसे अभी तक हम प्रचार के पर्दे पर आसन और प्राणायाम के लाभों की चर्चा देख रहे हैं जबकि इसके आठ भाग हैं-यम, नियम, प्रत्याहार, आसन, प्राणायाम, ध्यान, धारणा और समाधि। इन सभी विषयों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। प्राणायाम के  बाद  ध्यान का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसके अप्रत्यक्ष लाभों के जीवन पर होने वाले प्रत्यक्ष प्रभाव का अध्ययन किया जाना जरूरी है। कहने का अभिप्राय यह है कि हमें अभी भी योग विषयों पर विस्तृत अध्ययन और उसके परिणामों की मीमांसा करने की आवश्यकता है। विश्व भर में हो रहे प्रचार पर यह सोचकर चुप नहीं बैठ जाना चाहिये कि हमारा लक्ष्य पूरा हो गया।
दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’
ग्वालियर मध्यप्रदेश
Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
athor and editor-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
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