समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
-------------------------


Showing posts with label मस्तराम. Show all posts
Showing posts with label मस्तराम. Show all posts

Thursday, December 9, 2010

कानून की छत के नीचे-हिन्दी कविता (kanoon ki chhat ke neeche-hindi poem)

कानून की छत के नीचे
कुछ इंसानों का झुंड शांति से खड़ा है,
ऊपर हैं कुछ लोग जिनका कद बड़ा है।
सीढ़ियों पर लगी है एक तख्ती
यहां आम इंसान का प्रवेश वर्जित है,
कैसे ऊपर जाने की पात्रता पायें
सोच रहा है हर कोई
जो कानून की छत के नीचे
आम इंसानों की भीड़ में खड़ा है।
----------------
भीड़ में चमकने की ख्वाहिश
इंसान को अंधा बना देती है,
अपना अक्स नहीं देख पाते कुछ लोग
पर दूसरों को अपना रुतवा दिखाने की चाहत
उनको खूंखार बना देती है।
-----------

संकलक, लेखक और संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
athor and editor-Deepak "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com

यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.शब्दलेख सारथि
3.दीपक भारतदीप का चिंतन
4.दीपक बापू कहिन
५.हिन्दी पत्रिका 
६.शब्द पत्रिका 
७.ईपत्रिका 
८.जागरण पत्रिका 
९.हिन्दी सरिता पत्रिका 

अध्यात्मिक पत्रिकाएं