समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
-------------------------


Friday, March 6, 2009

संत कबीर के दोहे: मनुष्य के लिए खिचड़ी है स्वास्थ्यवर्द्धक

खुश खाना है खीचड़ी, माहिं पड़ा टुक लौन
मांस पराया खाय के, गला कटावै कौन

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि उदर के लिये सबसे अच्छा भोजन खिचड़ी है जिसमें थोड़ा नमक डाला गया है। दूसरे जीव का मांस खाकर अपना गला कौन कटाये?

वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-आदमी भोजन करने के विषय में केवल अपने जीभ के स्वाद का विचार करता है जबकि उस समय उसे केवल उसी वस्तु का भक्षण करने का प्रयास करना चाहिये जो पेट के लिये सुपाच्य हो। जब किसी का पेट खराब होता है तो चिकित्सक उसे आज भी खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं। हमारे यहां तो अनेक लोग आज भी नियमित रूप से खिचड़ी का सेवन करते हैं। यहां बात केवल खिचड़ी की नहीं है बल्कि खाने में सादा भोजन लेने से भी है। तेज मसाले से बनी बाजार की चीजों का सेवन करने से जीभ को स्वाद तो बहुत मिलता है पर वह पेट के लिये हानिकारक होती हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी मानता है कि पेट की खराबी से ही अधिकतर बीमारियां होती हैंं। ऐसे में भोजन और पेय पदार्थों में वही वस्तुऐं ग्रहण करना चाहिये जो पेट के पाचन तंत्र पर दुष्प्रभाव न डालती हों।

कुछ चिकित्सा विज्ञानी मानते हैं कि किसी भी प्रकार का मांस मनुष्य शरीर के लिये हितकारक नहीं हैंं। मांस में किसी प्रकार की शक्ति होती है यह भी केवल भ्रम हैं। कहा जाता है जैसा आदमी खाता है वैसे ही उसके विचार होते हैं। इसलिये अपने विचार शुद्ध बने रहे और तो मन में कभी निराशा या दुःख के भाव नहीं आते। यह विचार करते अपने भोजन में सात्विक वस्तुऐं ही ग्रहण कराना चाहिये जिसमें मौसमी फल भी शामिल होते हैं।
---------------------------------------
यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्दलेख पत्रिका
2.‘शब्दलेख सारथी’
3.दीपक भारतदीप का चिंतन
संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप

No comments:

Post a Comment

अध्यात्मिक पत्रिकाएं

आप इस ब्लॉग की कापी नहीं कर सकते

Text selection Lock by Hindi Blog Tips