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Saturday, August 8, 2015

बांग्लादेश में ब्लॉगर की हत्या से सबक सीखने की आवश्यकता-हिन्दी चिंत्तन लेख( murder of A Blogger in bangladesh-reading lesson-hindi thoughtt article)

                  बांग्लादेश में एक हिन्दू ब्लॉग लेखक की हत्या कर दी गयी है। हत्या करने वाले वहीं के वह चरमपंथी हैं जो हिन्दुओं को अपना दुश्मन मानते हैं। हिन्दू ब्लॉगर वहां के इन्हीं चरमपंथियों के विरुद्ध लिखता था।  बांग्लादेश में वह चौथा ब्लॉग लेखक है जिसे मारा गया है। एक योग तथा ज्ञान साधक होने के नाते यह लेखक तो यह मानता है कि धर्म शब्द मनुष्य के व्यवहार, विचार तथा आचरण विषय के सकारात्मक सिद्धांतों के सामूहिक रूप का प्रतिनिधि है और उसके साथ किसी अन्य शब्द जोड़ना ही गलत है। भारत के कट्टर धार्मिक भी हिन्दू शब्द से धर्म की  बजाय  एक संस्कृति से जोड़ते हैं पर पश्चिम से आयी विचारधारायें अपने नाम को अधिक महत्व देती हैं। भारत के पश्चिम में उत्पन्न धार्मिक विचारधाराओं के बीच हिंसक संघर्ष हुए हैं। जब तक उनका भारत में प्रवेश नहीं हुआ था तब तक यहां ऐसा कोई संघर्ष नहीं देखा गया।  आजादी के समय अंग्रेजों ने भारत का धार्मिक आधार पर विभाजन कर ऐसे ही संघर्ष को जन्म दिया जिसकी कल्पना यहां नहीं की जाती थी। आज पाकिस्तान और बांग्लादेश धार्मिक आधार पर ही भारत के प्रति दुर्भावना रखते हैं।
                                   एक दूसरा सवाल भी हमारे मन मे आ रहा है कि किसी भी धर्म के चरमपंथी आलोचना को सहन नहीं करते पर देखा तो यह भी जा रहा है कि अनेक राज्य भी लोगों की आस्था पर आघात पर प्रहार रोकने के लिये किसी भी धर्म की आलोचना को अपराध घोषित करती हैं। भारतीय अध्यात्मिक दर्शन के अनुसार धर्म की साधना एकांत का विषय पर विदेशी विचाराधाराओं  सार्वजनिक रूप से समूह में करने की प्रवृत्ति देखी जाती है। इसका लाभ धार्मिक ठेकेदार समूह को अपने हित साधने में उपयोग करते हैं। यही कारण है कि इन धार्मिक ठेकेदारों के इर्दगिर्द भीड़ देखकर राज्य प्रबंध उनके प्रति भय से सदाशयी हो जाता है।  इन्हीं ठेकेदारों से इशारा पाकर उन्मादी दूसरे धर्म के लोगों पर हमला करते हैं। मुश्किल यह है कि एक तो आस्था पर हमले रोकने के राजकीय प्रयासों के चलते वैसे ही किसी धर्म की सीधे आलोचना करने वाले बुद्धिमान कम ही मिलते हैं और जो मिलते हैं उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।  अगर यह सरकारी प्रयास न हो तो कथित आस्थाओं को चुनौती देने वाले बहुत हो जायेंगे तब उन्मादी कुछ नहीं कर पायेंगे। इसलिये अब आवश्यकता इस बात की है कि लोगों की आस्था या धार्मिक भावनाऐं आहत होने से रोकने के राजकीय प्रयास बंद होना चाहिये।
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दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’
ग्वालियर मध्यप्रदेश
Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
athor and editor-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
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