समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
-------------------------


Showing posts with label Russia. Show all posts
Showing posts with label Russia. Show all posts

Sunday, November 22, 2015

वैचारिक बहस से आतंकवाद पर नियंत्रण संभव नहीं संकट-हिन्दी लेख (World Terratish Not Control by Theorical Disscisopm-Hindi Article or Hindi lekh)

                           कथित रूप से अगर किसी धर्म का नाम लेकर उसके सिद्धांतों पर राज्यप्रबंध चलाने की बात कही जायेगी तो तय है कि उसके विद्रोही भी अपना संगठन चलाने की बात कहा सकते हैं। तब निष्पक्ष व्यक्ति यह तर्क स्वीकार कैसे कर सकता है कि  राज्यप्रबंध का धर्म से संबंध है पर आतंकवाद का नहीं।
                           आतंकवाद विश्व में एक व्यवसाय की तरह चल रहा है। आतंकी संगठन भी धर्म का उपयोग उसी तरह कर रहे हैं जैसे कि सफेदपोश व्यवसायी करते हैं। इस विषय पर धर्म के नाम पर बहस करने वालों में वैचारिक खोखलापन साफ दिखता है। दरअसल धर्म को लोगों ने पूजा पद्धति, खानपान, रहनसहन और चाल चलने के नियमों का समूह मान लिया है। विदेशी विचाराधाराओं पर यह नियम लागू हो पर भारतीय अध्यात्मिक दर्शन पर लागू नहीं होता। इसके अनुसार सांसरिक तथा अध्यात्मिक विषय प्रथक प्रथक हैं। हमें ऐसा लगता है कि भारत के बाहर पनपी  विचाराधाराओं में अध्यात्मिक ज्ञान का नितांत अभाव है शायद यही कारण है कि उसके कुछ अनुयायियों में अपने ही मत को लेकर भ्रम की स्थिति है जिससे आतंकवाद का वैश्विक संकट खड़ा हुआ है।
इस  समय विश्व में चल रहे आतंकवाद के इतिहास पर नज़र डालें तो यह साफ दिखेगा कि यह पैंतीस से अधिक वर्ष से चल रहा है। यह अलग बात है कि समय के साथ आतंक के शीर्ष और उनके संगठनों के नाम बदलते रहे हैं।  हथियारों के नये रूप तथा प्रचार माध्यमों की नयी तकनीकी के साथ आतंकवादी संगठनों का कार्यशैली बदल जाती है। हमने पिछले दस वर्षों से स्वयं देखा है कि पहले वेबसाईटें, ब्लॉग तथा अन्य साधनों के साथ पहले आतंकवादी बनाते हैं तो अब फेसबुक और ट्विटर भी का भी उन्होंने पहले अपने ढंग से पूरा उपयोग किया। जहां तक आतंकवाद का युद्ध से सामना करने का सवाल है वह एक अलग विषय है पर समस्या यह है कि कुछ लोग इस पर वैचारिक बहस कर अपनी धार्मिक चर्चायों करने लगते हैं और इससे समाज में भ्रम फैलता है। यही कारण है कि कम से कम इस संकट का हल वैचारिक प्रहार से होता नहीं दिखता। जब तक भारतीय दर्शन के आधार पर अध्यात्मिक तथा सांसरिक विषयों को प्रथक नहीं देखा जायेगा तब तक आतंकवाद का कम से कम वैचारिक रूप से मुकाबला करना बेमानी है।

दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’
ग्वालियर मध्यप्रदेश
Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 

athor and editor-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.शब्दलेख सारथि
3.दीपक भारतदीप का चिंतन
४.शब्दयोग सारथी पत्रिका
५.हिन्दी एक्सप्रेस पत्रिका 
६.अमृत सन्देश  पत्रिका

Saturday, October 10, 2015

रूस का आईएसआईएस के विरुद्ध अभियान का मतलब-हिन्दी लेख (meaning of russian Action against ISIS-Hindi Article) ---------------------------


                                   अब यह सवाल तो उठेगा कि अमेरिका बरसों से आतंकवाद से लड़ रहा है पर फिर भी समस्या बढ़ क्यों रही हैतय बात है कि अच्छे और बुरे आतंकवाद का वह फर्क करता है।  रूस ने अरब के आतंकवादियों पर हमला कर उनकी कमर तोड़ने का अभियान शुरु किया है उसकी कार्यवाही का  अमेरिका इस आधार पर विरोध कर रहा है कि इससे सीरिया की वर्तमान सरकार के विरोधियों का नाश होगा जो उससे हथियार और दूसरी मदद पाते हैं। प्रश्न यह है कि अगर सीरिया की जनता वहां के लोगों से नाराज है तो वह स्वयं निपट लेगी। विद्रोहियों को हथियार बेचकर अमेरिका वहां बदलाव क्यों लाना चाहता है? पिछले अनेक दिनों से वहां आईएसआईएस ने आतंक फैला रखा है जिसकी लपटें पूरे विश्व में फैल रही हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी राष्ट्रों के हमले के बाद भी आईएसआईएस का वैश्विक प्रचार बना हुआ रहा है।
                                   अब रूस की कार्यवाही के बाद लग रहा है कि वहां वाकई में आईएसआईएस की तबाही हो रही है। हालांकि रूस का इस कार्यवाही के पीछे लक्ष्य भी अमेरिका जैसा ही हथियारों का प्रदर्शन कर उनके लिये बाज़ार बनाना तथा तेल भंडारों पर स्वामित्व स्थापित करना है पर हम भारत की दृष्टि से यूं बेहतर मानते हैं कि आईएसआईएस के पतन की संभावनाओं ने यहां एक सकारात्मक वातावरण बना है। अगर रूस के हमले से भले ही अरब देशों में आतंक का पूरी तरह नाश न हो पर आईएसआईएस को मिल रहे मुफ्त प्रचार पर रोक अवश्य लगेगी। इससे विश्व खास तौर से पश्चिमी देशों में जो उसका आकर्षण फैल रहा था वह समाप्त हो जायेगा।  इतना ही नहीं हमने देखा है कि जब पश्चिम और मध्य ऐशिया में कोई धार्मिक उन्मादी संगठन आक्रामक रूप से प्रचारित  होता है तो उसके सहविचारक अन्य देशों में भी आक्रामक हो जाते हैं। पहले अलकायदा के दौर में और अब आईएसआईएस के मामले में यही होता रहा है।  आईएसआईएस का पतन उनकी इस आक्रामकता को समाप्त कर देगा।  बहरहाल हमारी दृष्टि से रूस ने एक साहसिक कदम उठाया है और उसकी पूर्ण या आशिंक सफलता आतंकवाद के एक दौर को खत्म करेगी। यह फिलहाल तय लग रहा है।
------------
दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’
ग्वालियर मध्यप्रदेश
Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
athor and editor-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.शब्दलेख सारथि
3.दीपक भारतदीप का चिंतन
४.शब्दयोग सारथी पत्रिका
५.हिन्दी एक्सप्रेस पत्रिका 
६.अमृत सन्देश  पत्रिका

अध्यात्मिक पत्रिकाएं