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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
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Monday, October 17, 2016

छोटे व मध्यम व्यापारियों की कमाई का भी ध्यान रखना होगा-चीनी सामान के बहिष्कार से देशभक्ति जोड़ने पर एक लेख (Attension takes of Poor and Middle Class Treders-Boycott of chines good and Natinaliti-Hindi Article)


                                                            चीन भारत के प्रति शत्रुभाव रखता है यह सर्वविदित है और हम तो उसके भारत के उपभोक्ता बाज़ार में खुले प्रवेश पर पहले भी सवाल उठाते रहे हैं। सबसे बड़ा हमारा सवाल यह रहा है कि भारत में लघुउद्योग व कुटीर उद्योग को प्रोत्साहन की नीति थी वह सफल क्यों नहीं रही? इन लघु व कुटीर उद्योगों में निर्मित छोटे छोटे सामान भारतीय परंपराओं का अभिन्न भाग होते थे। यह पता ही नहीं चला कि चीनी सामान ने भारतीय बाज़ार में प्रवेश किया पर इतना तय है कि यह देश के आर्थिक तथा राजनीति के शिखर पर विराजमान लोगों के आंखों के सामने ही हुआ था-या कहें उन्होंने अपनी आंखें फेर ली थीं।
                                           अब अचानक चीन के एक आतंकी के प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार दिखाने पर उसके सामान के बहिष्कार का आह्वान देशभक्ति के नाम पर किया जा रहा है।  सच कहें तो अब देशभक्ति को सस्ता बनाया जा रहा है।  इस समय दिवाली के अवसर पर पर्व से संबंधित पटाखे, सजावाट का सामान तथा खिलौने आदि न खरीदने के लिये जोरदार अभियान चल रहा है।  हम बता दें कि मोबाइल, लेपटॉप तथा कंप्यूटर में भी ढेर सारा चीनी सामान लगा है।  अनेक आधुनिक सामान तो चीन से पुर्जें लाकर यही संयोजित किया जाता है।  हमें एक दुकानदार ने बताया था कि इनवर्टर, स्कूटर , कार तथा चाहे कहीं भी लगने वाली जो भी बैट्री हो वह चीन में ही बनती है।  इस समय बड़े व्यापारियों से कोई अपील नहीं कर रहा-क्योंकि उन्हें शायद देशभक्ति दिखाने की जरूरत नहीं है।  इसके लिये आसान शिकार मध्यम तथा निम्न वर्ग का व्यवसायी बनाया जा रहा है।  हम यहां चीनी सामान बिकने का समर्थन नहीं कर रहे पर हमारे देश के मध्यम तथा निम्न वर्ग के व्यवसायियों के रोजगार की चिंता करने से हमें कोई रोक नहीं सकता।  वैसे ही हमारे देश में रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं।  आजकल छोटे व्यापारी आधुनिक मॉल संस्कृति के विकास के कारण वैसे भी अस्तित्व का संघर्ष कर रहे हैं-स्थित यह है कि उनकी नयी पीढ़ी अपना पैतृक काम छोड़कर नौकरी की तलाश में घूम रही हैं।  ऐसे में दिपावली तथा होली जैसे पर्वों के समय जो अधिक कमाने की जिम्मेदारी योजना होती है उस पर पानी फिरा जा रहा है।  अनेक लोगों ने चीन का सामान भरा है और अगर उनकी बिक्री कम हुई तो पूंजी का नाश होगा-हालांकि जिस तरह महंगाई व आय के असमान वितरण ने जिस तरह समाज के एक बहुत बड़े वर्ग की क्रय क्षमता को कम किया उससे भी दीवाली पर चीनी सामान की बिक्री कम हो सकती है। यह अलग बात है कि इसे देशभक्ति के खाते में ही दिखाया जायेगा।
                                       अपनी रक्षा की इच्छा रखने वाला हर आदमी देश के प्रति वफादार होता है-देशभक्ति दिखाने में उत्साह रखना भी चाहिये पर इसका मतलब यह नहीं है कि हम हर छोटे विषय पर भी अपने दाव खेलने लगे।  देश में आर्थिक असमंजसता का वातावरण है इसलिये यह ध्यान रखना चाहिये कि अपने नागरिकों की हानि न हो। हमें सबसे ज्यादा आपत्ति उस योग शिक्षक पर कर रहे हैं जिसने योग व्यवसाय के दम पर बड़ी कंपनी बनाकर पूंजीपति का उपाधि प्राप्त कर ली और अब चीनी सामान के बहिष्कार का आह्वान कर रहा है।  इस तरह वह छोटे व्यापारियों को उसी तरह संकट में डाल रहा है जैसे कि उसकी हर मोहल्ले में खुली दुकानें डाल रही हैं।  अगर उसमें हिम्मत है तो चीन से आयात करने वाले बड़े दलालों, व्यापारियों तथा उद्योगपतियों से देशभक्ति दिखाने को कहें-जिनका अरबों का विनिवेश चीन में हैं।  प्रसंगवश हमने हमेशा ही मध्यम वर्ग के संकट की चर्चा की है और इस विषय में जिस तरह देशभक्ति दिखाने के लिये फिर उसे बाध्य किया जा रहा है उस पर हमारी नज़र है।
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Saturday, September 26, 2015

भारतीय रणनीतिकार नेपाल से कौटिल्य नीति अपनायें-हिन्दी लेख(bharatiy ranneetikar nepal se kautilya neeti apnayen-Hindi Lekh)

                                   हिन्दू देश होते हुए भी नेपाल को यह बात समझ में नहीं आयी कि भारत उसके नखरे इसलिये उठा रहा है  क्योंकि वह उसे सहधर्मी राष्ट्र मानता है।  नेपाल ने अभी न केवल अपना संविधान धर्मनिरपेक्ष बनाया वरन् भारत के लोगों से नागरिकता भी छीन ली।  अब वहां अशांति फैल गयी है। एक बात तय रही कि वहां के नेता  चीन तथा मध्यएशिया राष्ट्रों के चंगुल में फंस गये लगते हैं।  भारत के विरोध को दरकिनार कर जिस तरह उसने संविधान बनाया उसके बाद उसे यहां से समर्थन की आशा नहीं करना चाहिये।  भारत से वहां आवश्यक सामान जाना बंद हो गया है।  नेपाल के विदेशमंत्री ने भारतीय दूत को बुलाकर उसे चेतावनी दी तो उसने साफ कह दिया कि आपके यहां अशांति के कारण भारत से मालवाहक वाहन नहीं आ रहे हैं।
                                   संभवत कोई  अंतर्राष्ट्रीय कानून है जिससे बंदरगाह विहीन राष्ट्र को पड़ौसी देश अपनी समुद्रीसीमा से आवश्यक रूप से माल ढूलाई के अवसर प्रदान करता है पर नेपाल कभी इस खुशफहमी में रहे कि भारत उसे अब झेलेगा।
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में कहा गया है कि
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कौमें संकोचमास्थाय प्रहारमपि मर्धयेत्।
काले प्राप्ते तु मतिमानुत्ष्ठिक्रूरसर्पवत!।।
                                   हिन्दी में भावार्थ-समय पड़ने पर शत्रु का प्रहार कछूए की तरह अंग समेटकर सहन करन के बाद  अवसर मिलते ही क्रूर सर्प के समान प्रहार भी करना चाहिये।
                                   इस समय जैसी भारत में स्थिति है उसके अनुसार तो नेपाल को भारत से ज्यादा अनुकूल व्यवहार करना चाहिये था पर लगता है कि विनाशकाले विपरीतबुद्धि की वजह से नेपाल के नेता गलत रास्ते पर जा रहे हैं। भारत सैन्य कार्यवाही के अलावा अनेक प्रकार से नेपाल को संकट में डाल सकता है। इस समय भारतीय रणनीतिकार किसी देश से दबने वाले नहीं है। यह तो मानना पड़ेगा कि भारतीय रणनीतिकार कौटिल्य अर्थशास्त्र की नीतियां अपनाकर जिस तरह काम कर रहे हैं उससे देश की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
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दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’
ग्वालियर मध्यप्रदेश
Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
athor and editor-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
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