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Friday, November 5, 2010

धार्मिक विचार-अपने ऊपर निर्भर काम ही शुरू करें

मनुष्य स्वभाव से ही अहंकारी होता है ऐसे में जब उसे कहीं अपने व्यक्तित्व के कमजोर होने की अनुभूति पर वह हताश होता है। आजकल लोगों ने अपनी जरूरतें इतनी बढ़ा ली हैं कि उसके लिये उनको दूसरों की सहायता लेनी पड़ती है जो कालांतर में उनके स्वाभिमान पर आघात पहुंचाती है। जब कोई मनुष्य अपना काम दूसरे पर छोड़ता है तब उसे इस बात का ज्ञान नहीं होता कि उसका बदला भी उसे चुकाना है। ऐसे में जब उसे प्रत्युत्तर में काम करना या दाम देना होता है तब उसका दम फूलने लगता है। शायद इसलिये कहा गया है कि अपना हाथ जगन्नाथ। इसलिये जहां तक हो सके दूसरों पर निर्भर होने वाला काम शुरु ही नहीं करना चाहिए। मनु स्मृति में अनेक ऐसी बातें कही गयी हैं जो आज भी प्रेरणा देती हैं
सर्वे परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।
एतद्विद्यात्समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः।।
हिन्दी में भावार्थ-
जो कार्य दूसरे के अधीन है वह दुःखदायी होता है। जिस काम पर अपना पूरी तरह से नियंत्रण हो उसी से ही सुख मिलता है। यही सुख और दुःख का लक्षण है।
यत्कर्मकुर्वतोऽस्य स्यात्परितोषोऽन्तरात्मनः।
तत्प्रयतनेन कुर्वीत विपरीतं तु वर्जयेत्।
हिन्दी में भावार्थ-
जिस काम को करने से मन और अंतरात्मा को शांति मिलती हो वही करना चाहिए। जिससे इसके विपरीत स्थिति हो तो उस काम को त्याग देना चाहिए।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-जब भी हमारे सामने कोई कार्य उपस्थित होता है तो उसके परिणामों, प्रकृति तथा स्वरूप पर अवश्य विचार करना चाहिए। कभी कोई कार्य दबाव या परप्रेरणा से नहीं करना चाहिऐ। इसके अलावा जो कार्य पूरे या आंशिक रूप से दूसरे पर निर्भर हो उसे अपने हाथ में न लें तो ही अच्छा। क्योंकि तब लक्ष्य की प्राप्ति दूसरे की गतिविधि पर निर्भर हो जाती है। अनेक बार ऐसा भी होता है कि दूसरा आदमी अगर अंदर ही अंदर द्वेष रखता है तो वह जानबूझकर उस काम का अपना पूरा या आंशिक दायित्व नहीं निभाता तब अपना लक्ष्य या अभियान संकट में पड़ जाता है।
इसके अलावा किसी भी कार्य को करते हुए इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि उससे अपने मन और अंतरात्मा को संतोष मिलेगा या नहीं। जिस काम को करने से मन और अंतरात्मा में क्लेश होता हो उससे करने का विचार ही छोड़ दें तो ही अच्छा होगा। कहने का अभिप्राय यह है कि अपने हाथ से किये जाने वाले कार्यों पर विचार करना चाहिए ताकि उनके परिणामों को लेकर बाद में पछताना न पड़े। बुद्धिमान व्यक्ति किसी भी काम को करने से पहले उसके हर पहलू पर विचार कर लेते हैं।
अनेक बार हम दूसरों के कहने पर या किसी कि कामयाबी को देखकर वैसा ही काम करने लग जाते हैं। यह देखने का प्रयास ही नहीं करती कि उसने यह सब किया कैसे? ऐसे बिना सोचे काम करने का परिणाम कभी ठीक नहीं होता।
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संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://anantraj.blogspot.com
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